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बिहार के इन जिलों को नए साल में मिलेगा सौगात, नहीं होगी बिजली की क़िल्लत जानिए



बिजली उत्पादन की महत्वपूर्ण परियोजना डगमारा विद्युत परियोजना से जगमग होगा उत्तर बिहार। नए साल में नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं। परियोजना को नेशनल हाईडल पावर कारपोरेशन( NHPC) के हवाले किए जाने, एनएचपीसी की टीम द्वारा स्थल निरीक्षण किए जाने और स्थल को उपयुक्त तथा संतोषप्रद बताए जाने के बाद इसके लिए राशि विमुक्त कर दिए जाने से उम्मीदों को बल मिलने लगा है। उक्त परियोजना बिहार सरकार द्वारा एनएचपीसी को सुपुर्द कर दिया गया है।

परियोजना के तहत 730 मीटर का बराज बनेगा। पूर्वी और पश्चिमी कोसी तटबंध का जलजमाव क्षेत्र कोसी बराज पर अप स्ट्रीम होगा। परियोजना का कैचमेंट एरिया 61 हजार 972 वर्गमीटर है। विशेषज्ञों की राय में यह परियोजना कोसी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में जिला आत्मनिर्भर बनेगा। साथ ही बाढ़, ङ्क्षसचाई सहित कई समस्याओं का भी समाधान होगा। बिजली उत्पादन की महत्वपूर्ण परियोजना डगमारा विद्युत परियोजना स्थानीय विधायक सह उर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रहा है।

सूबे की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना

कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में 22.5 किमी पर वीरपुर से कटिहार के कुर्सेला के बीच पनबिजली की क्षमता का पता बताने के बाद राज्य सरकार ने इसके निर्माण की दिशा में कसरत शुरू की। यह बिहार की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना होगी। कोसी प्रक्षेत्र में स्थापित होने वाली 126 मेगावाट की इस परियोजना को बिहार सरकार कैबिनेट से मंजूरी देते हुए अपने हिस्से की 700 करोड़ की राशि जारी कर दी गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2400 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के पूरा होने पर कोसी नदी पर एक नए बैरेज के साथ 130 मेगावाट बिजली आपूर्ति होगी जिससे कोसी वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति होगी।

परियोजना पर एक नजर

126 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली डगमारा परियोजना को कोसी बराज से 31 किमी की दूरी पर निर्माण का प्रस्ताव किया गया है। परियोजना का विस्तृत प्रतिवेदन दिसंबर 2011 में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को सौंपा गया। इस पर केंद्रीय जल संसाधन विभाग और केद्रीय जल आयोग की सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी। कई बार विवादों में उलझे इस परियोजना का सर्वेक्षण कार्य भी पूर्व में ही पूरा किया जा चुका है।

कोसी स्थित हनुमाननगर बराज के निर्माण के बाद वर्ष 1965 में केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष श्री कंवरसेन के द्वारा डगमारा में दूसरे बराज की आवश्यकता पर बल दिया गया था ताकि कोसी के कटाव की विभीषिका को निचले स्तर पर भी नियंत्रित किया जा सके। 1971 में बिहार जल संसाधन विभाग के द्वारा गठित तकनीकी समिति ने भी उक्त प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी तथा बराज के कारण बने ऊंचे जलस्तर में जल विद्युत परियोजनाओं की संभावनाओं को भी इसके साथ जोड़ा गया।

वर्ष 2007 में परियोजना निर्माण में एशियन डवलपमेंट बैंक द्वारा रुचि दिखाई जाने के बाद डगमारा परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन बनाने का कार्य केंद्रीय जल संसाधन विभाग की एजेंसी वैपकास को दिया गया। वैपकास द्वारा बनाए गए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन को 2010 में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण में अनुमति के लिए जमा किया गया। प्रतिवेदन की जांच के दौरान प्रस्तावित परियोजना के फलस्वरूप नेपाल के बड़े क्षेत्र में डूबे होने के कारण केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने उक्त परियोजना पर अपनी सहमति नहीं दी तथा केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग भारत सरकार के द्वारा परियोजना को और निचले स्तर पर ले जाने का सुझाव दिया गया।

उक्त परिपेक्ष्य में डगमारा परियोजना को और नीचे लाकर वर्तमान बराज से करीब 31 किमी की दूरी पर निर्माण का प्रस्ताव किया गया। इस संबंध में परियोजना के विस्तृत प्रतिवेदन दिसंबर 2011 में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को सौंपा गया तथा इस पर केंद्रीय जल संसाधन विभाग एवं केंद्रीय जल आयोग की सैद्धांतिक सहमति मिली। परियोजना की स्वीकृति के संबंध में दिनांक 25.04.2012 को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण में परियोजना की तकनीकी स्वीकृति के लिए अंतर मंत्रालयीय समिति में विस्तृत चर्चा हुई तथा परियोजना पर आगे की कार्रवाई के लिए सहमति बनी। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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