कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन का असर चौतरफा दिखने लगा है। जिले के 400 साल पुराने विश्व प्रसिद्ध पाटरी उद्योग को गहरी चोट पहुंची है। इस उद्योग से जुड़े लोेगों पर माने तो अब तक उन्हें दो से ढाई करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। केवल 50 लाख रुपए का आइक्रीम मटका बेकार पड़ा है। अगर लॉक डाउन बढ़ता है इसकी उपयोगिता ही समाप्त हो जाएगी और उनकी सारी मेहनत कूड़े के ढेर में चली जाएगी। कारोबार ठप होने से कुम्हार आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे है लेकिन अब तक इन्हें सरकारी सहायता भी नहीं मिली है।
जिले में पाटरी कला का उद्भव करीब 400 साल पहले आलमगीर के शासनकाल में हुआ था। इस उद्योग ने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई। आज भी विदेशों से लोग इस कला को सीखने और यहां के उत्पादों को खरीदने के लिए आते है। निजामाबाद के दो दर्जन से अधिक कुम्हार अपनी कला के लिए राष्ट्रपति के हाथों अथवा राज्य दक्षता पुरस्कार से सम्मानित है लेकिन सरकारों ने इस उद्योग की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया। इसके बाद भी यहां के कुम्हारों ने इस कला को जीवंत रखा।
एक जनपद एक उत्पाद योजना से मिली संजीवनी :- वर्ष 2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी ने कुम्हारों को न केवल भूमि का आवंटन किया बल्कि इस उद्योग को एक जनपद एक उत्पाद योजना में शामिल कर संजीवनी देने का काम किया। पिछले दिनों यहां के कुम्हार सोहित को मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल होने के खुद पीएम ने आमंत्रित किया था। इससेे यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा। निजामाबाद के कुम्हार अपने पाटरी उत्पादों को दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पूना, नागपुर, बंगलूरू, पंजाब आदि राज्यों में सप्लाई करते है।
मार्च-जून के बीच होता है कारोबार :- वाराणसी अथवा आजमगढ़ आने वाले पर्यटक भी यहां घूमने और पाटरी सामानों के खरीदने के लिए पहुंचते रहे है। यहां के लोग प्रति माह एक से डेढ़ करोड़ रुपए का कारोबार करते है। मार्च से जून के बीच इनका कारोबार काफी बढ़ जाता है। कारण कि दूसरों राज्यों के लिए भी यहां के कुम्हार आइसक्रीम मटका तैयार करते है। इस मटके से इनका 70 से 75 लाख रुपए का कारोबार सीजन में हो जाता है लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण 22 मार्च को ही लॉक डाउन शुरू हो गया। आर्डर के हिसाब से कुम्हार केवल 50 लाख का आइसक्रीम मटका तैयार कर चुके है लेकिन इनकी सप्लाई ठप है। वहीं पाटरी का करोड़ों का सामन भी डम्प पड़ा है।
आगे भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा :- राज्य दक्षता पुरस्कार से सम्मानित सोहित प्रजापति व महेंद्र प्रजापति का कहना है कि लॉक डाउन ने पाटरी उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। अब तक कारोबारियों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। अगर लॉक डाउन बढ़ता है तो दिक्कत और बढ़ेगी। कारण कि आइसक्रीम मटके की उपयोगिता दो महीने में पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। फिर इसे बेचने के लिए एक साल प्रतीक्षा करनी होगी। अन्य सामान भी डम्प पड़ा है। हमारे पास जो जमापूंजी थी वह लॉक डाउन के दौरान जरूरतों को पूरा करने में समाप्त हो चुकी है। आगे भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा। कारण कि अब तक हमें सरकारी सहायता भी नहीं मिली है।




Comments
Post a Comment