Skip to main content

बिहार के इस ज़िला मे बनेगा 4.8 किमी लंबा बाइपास, मिलेगा जाम से निजात




शहर काे जाम से निजात दिलाने के लिए बीते डेढ़ साल से केवल याेजना ही बन रही है। जाम से राहत दिलाने के लिए शहर में बाइपास बनाने की याेजना बनी। इसके लिए निगम की सड़काें काे पथ निर्माण विभाग के हवाले किया गया। इसके साथ ही पथ निर्माण विभाग की ओर से बाइपास के निर्माण के लिए एस्टीमेट बनाया गया और उसकी स्वीकृति के लिए विभाग काे भेजा गया। लेकिन वहां से सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद राशि अब तक नहीं मिली और इस दिशा में पहल नहीं हाे सकी।

अब एक बार फिर इसे स्मार्ट सिटी प्राेजेक्ट के तहत बनाने की याेजना पर काम शुरू किया गया है। शहर के अंदर 4.8 किलाेमीटर का बाइपास बनेगा। इसके लिए नगर आयुक्त डाॅ. याेगेश सागर ने स्मार्ट सिटी के अफसराें काे प्लान बनाकर एस्टीमेट बनाने का निर्देश दिया है।

उन्हाेंने बताया कि घंटाघर चाैक के पास से आदमपुर, एसएम काॅलेज राेड, मायागंज अस्पताल से डीएम काेठी, तुलसीनगर हाेते हुए जवारीपुर के पास यह सड़क मिल जाएगी। इससे वाहन घंटाघर से सीधे जवारीपुर के पास निकल जाएगा, जिससे शहर की मुख्य सड़काें पर वाहनाें का दबाव कम हाे जाएगा और जाम से भी राहत मिलेगी।

ये हाेगा लाभ

शहर में एक ही राेड पर वाहनाें का हमेशा दबाव रहता है। ब्रांच राेड में वही लाेग जाते हैं जाे इस शहर के रहने वाले हैं और उन्हें रास्ता पता है। लेकिन जब बाइपास घाेषित यह सड़क हाे जाएगा ताे बाहर के लाेग भी उस रास्ते से आना-जाना करेंगे। इसके लिए जगह-जगह संकेतक भी लगाए जाएंगे। .

विभाग से तालमेल पर काम में आ सकेगी गति

जानकार बताते हैं कि पथ निर्माण विभाग की ओर से पहले बाइपास बनाने की याेजना थी। इसके लिए विभाग ने डीपीआर व एस्टीमेट भी तैयार कर लिया था। अगर स्मार्ट सिटी कंपनी चाहे ताे पथ निर्माण विभाग से आपसी समन्वय करके उसे ले सकती है। इससे काम में गति आएगी।

ऐसा हाेगा रास्ता

घंटाघर चाैक से नवयुग विद्यालय राेड हाेते हुए आदमपुर चाैक से काेयला घाट राेड हाेकर एसएम काॅलेज से खंजरपुर की ओर यह सड़क जाएगी। खंजरपुर से मायागंज हाेकर डीएम आवास के पास से आगे जाकर तुलसीनगर हाेकर जवारीपुर माेड़ पर यह सड़क मेन राेड में मिलेगी।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...