Skip to main content

ये है दुनिया की सबसे छोटी गाय, इसकी एक झलक देखने हजारों की संख्या में आ रहे लोग, देखें तस्वीरें.

world-smallest-cow-found-in-bangladesh

दुनिया में कई तरह के जीव जन्तु होते हैं। लेकिन कई बार कुछ इस कदर पैदा होते हैं कि वह अपने जैसे बाकी जानवरों से अलग दिखते हैं। अब बांग्लादेश में स्टार बनी रानी नाम की इस गाय को ही ले लीजिए। गाय सबसे कॉमन पालतू जानवर है। कई किसान इसे पालते हैं। बहुत से लोग शौक के चलते भी गाय को पालते हैं। भारत में गाय को देवता समान पवित्र माना गया है। गाय की भी कई प्रकार की नसलें होती है। आमतौर पर गाय साइज़ में अच्छी खासी बड़ी होती है। उसे उठाना या घर में रखना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।

world-smallest-cow-found-in-bangladesh

लेकिन बांग्लादेश की स्टार रानी गाय देखने में किसी पालतू कुत्ते जैसी लगती है। जब वह बकरी के पास में खड़ी होती है तो वह बकरी भी इस गाय से बड़ी दिखती है। गाय का मालिक इसे दुनिया की सबसे छोटी गाय होने का दावा कर रहा है। यह गाय बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका से 30 किलोमीटर दूर स्थित फॉर्म पर रहती है। रानी नाम की यह गाय सिर्फ 20 इंच की है।

world-smallest-cow-found-in-bangladesh

बांग्लादेश में इस समय लॉकडाउन लगा हुआ है। यहाँ की सरकार ने लोगों को घर पर ही रहने की सलाह दी है। लेकिन इसके बावजूद लोग घरों से निकल इस गाय को देखने हजारों की संख्या में आ रहे हैं। गाय की उम्र सिर्फ 23 महीने बताई जा रही है। अपने साइज़ की वजह से ये गाय रातोंरात स्टार बन गई है। मीडिया में भी हर तरफ इसी के चर्चे हो रहे हैं।

इस गाय की मुंह से पूंछ तक की कुल लंबाई सिर्फ 26 इंच है। यह गाय 23 महीने की हो गई है लेकिन फिर भी इसका वजन सिर्फ 26 किलोग्राम है। इस गाय के मालिक का दावा है कि वर्तमान में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जिस गाय का नाम दुनिया की सबसे छोटी दाय के रूप में दर्ज है उससे रानी चार इंच छोटी है। हालांकि फिलहाल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से रानी को दुनिया की सबसे छोटी गाय नहीं माना गया है।

गाय के मालिक के अनुसार वह अपनी गाय का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराना चाहता है। लेकिन ऐसा होने में तीन महीने तक का समय लग सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में दुनिया की सबसे छोटी गाय का रिकॉर्ड भारत के केरल राज्य की माणिक्यम नाम की गाय के नाम है। यह रिकार्ड गाय ने साल 2014 में अपने नाम किया था। तब वेचुर नस्ल की माणिक्यम गाय की लंबाई 24 इंच मापी गई थी। अब यदि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बांग्लादेश की रानी नाम की गाय की लंबाई मापकर उसे मान्यता देता है तो वह दुनिया की सबसे छोटी गाय का ताज अपने नाम कर लेगी।

जैसे ही लोगों को इस बोनी गाय की खबर लगी तो वे इसे देखने आने लगे। हर कोई यहां आकर गाय के साथ सेल्फी ले रहा है। अभी तक 15 हजार से ज्यादा लोग इस गाय को देखने आ चुके हैं। इस गाय को शिकार एग्रो फार्म में पाला जा रहा है। इसे उन्होंने नौगांव के एक फॉर्म में पैदा होने के बाद खरीदा था।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...