Skip to main content

बिल्ली का बच्चा समझकर घर ले आए, धोखा हो गया..वन विभाग की टीम समय पर पहुंच गई! वरना….

Brought it home thinking it was a kitten, got cheated..the forest department team reached on time! Otherwise....
Brought it home thinking it was a kitten, got cheated..the forest department team reached on time! Otherwise....

Newborn Leopard Baby: जंगल में जानवर और उनके बच्चों की भरमार होती है. कई बार बड़े से बड़े एक्सपर्ट भी उनकी पहचान नहीं कर पाते हैं. इसी कड़ी में और मामला सामने आया है जब हाल ही में हरियाणा के एक परिवार के साथ धोखा हो गया. हुआ यह कि वे जिसे बिल्ली का बच्चा समझकर लाए थे वे दरअसल में बिल्ली के बच्चे नहीं थे बल्कि तेंदुए के शावक थे. बाद में जब उनको पता चला तो वे भौचक्के रह गए. गनीमत इस बात की भी रही कि बहुत सही समय पर वन विभाग की टीम वहां पहुंच गई और दोनों शावकों का रेस्क्यू किया गया. बाद में दोनों की मां से भी उन्हें मिलाया गया.

दरअसल, यह घटना हरियाणा के नूह जिले की है. घटना गुरुवार की है जब चरवाहे का एक परिवार अपनी मवेशियां चराने के लिए ही पास के ही जंगल में गया हुआ था. जंगल से ही सटे कोटला गांव के पहाड़ में उनको तेंदुए के दो बच्चे दिखाई दिए तो उनको लगा कि ये बिल्ली के बच्चे हैं क्योंकि आसपास कोई और जानवर उस समय नहीं दिख रहा था. वे भूख-प्यास से सीख भी रहे थे. इतना ही नहीं उनके आसपास कुत्तों को भोंकता देख वह परिवार उन्हें बचाने के उद्देश्य से अपने साथ घर लेकर आ गया.इधर गांव में उन दोनों को दूध पिलाया गया और आसपास के लोग इकट्ठे हो गए. तभी किसी ने कहा कि ये बिल्ली के बच्चे नहीं बल्कि तेंदुए के शावक हैं. इतना सुनते ही वहां हड़कंप मच गया और लोग मोबाइल में उनकी तस्वीरें और वीडियोज कैद करने लगे. तभी किसी की सूचना पर वन विभाग की टीम भी पहुंच गई. उनके साथ पुलिस की भी एक टीम थी. वन विभाग की टीम ने वहां पहुंचते ही तेंदुए के दोनों शावकों को कब्जे में ले लिया.

बताया गया कि दोनों शावकों में से एक नर जबकि दूसरा मादा है. दोनों का सफल रेस्क्यू करने के बाद वन विभाग के अधिकारी शावकों को वहीं ले गए, जहां से वो उन गांववालों को मिले थे. इसी बीच एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि अच्छी बात यह रही कि उन दोनों शावकों की मां तेंदुआ उस स्थान पर आई और कुछ ही देर में अपने दोनों बच्चे को साथ ले गई.

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...