Skip to main content

भारत के इस राज्य में नहीं लगता एक रुपया भी इनकम टैक्स, जानिये क्या है कारण

Income Tax Rule : भारत में एक तरफ जहां विभिन्न राज्यों के लोग इनकम टैक्स देते हैं, वहीं एक स्टेट ऐसा भी है जहां के लोगों को एक रुपया भी टैक्स के रूप में नहीं देना पड़ता, बेशक उनकी कमाई करोड़ों में हो। आइये जानते हैं इसके पीछे का कारण इस खबर में।


सुनने में बड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन है सोलह आने सच। भारत का एक राज्य ऐसा भी है जहां के लोगों को इनकम टैक्स की कोई टेंशन ही नहीं है। बता दें कि पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर इस राज्य के टैक्स फ्री (Tax Free State) होने के बारे में खूब चर्चाएं हो रही हैं। इस खबर में जानिये पूरी सच्चाई।

सिक्किम के लोग इनकम टैक्स को लेकर हैं टेंशन फ्री

जुलाई माह का अंतिम दिन कल यानी 31 जुलाई को है। देशभर के टैक्सपेयर्स इस समय अपनी आईटीआर दाखिल करने में लगे हैं। कल ही इसकी आखिरी तारीख भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का एक राज्य (Tax Free State Sikkim)ऐसा भी है, जहां के निवासी इनकम टैक्स के झमेले से कोसों दूर हैं।

इन लोगों को रिटर्न भरने की कोई जरूरत ही नहीं क्योंकि उन पर इनकम टैक्स (Income Tax rule in sikkim)लगता ही नहीं है। जी हां, यह बात पूरी तरह से लागू होती है सिक्किम के लोगों पर। उन्हें बिल्कुल भी इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।

इस कारण नहीं लगता इनकम टैक्स


सिक्किम भारत का इकलौता राज्य है, जहां के लोगों को एक रुपये का भी इनकम टैक्स (no income tax in sikkim)नहीं देना होता। इसकी वजह यह है कि जब सिक्किम का विलय भारत में किया गया था तो उसमें यह शर्त रखी गई थी कि उनसे इनकम टैक्स न लिया जाए। यहां पर इस बात की जानकारी भी आपको दे दें कि सिक्किम के निवासियों को 1975 के विलय समझौते और संविधान के आर्टिकल 371F के तहत यह विशेष राहत मिली हुई है। यानी इन लोगों के लिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 कोई मायने नहीं रखता।

31 जुलाई की भी नहीं कोई टेंशन


पूरे देश में 31 जुलाई इनकम टैक्स रिटर्न (income tax return ki last date)भरने की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। सिक्किम के लोगों को इससे कोई सरोकार नहीं है। उनके लिए ऐसी कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है। यहां के लोगों को उनके कारोबार या नौकरी से होने वाली इनकम पर शून्य टैक्स है।

विलय के दौरान यह रखी गई थी शर्त


सिक्किम का विलय (Sikkim income tax rule)भारत में सन 1975 में हुआ था। उस दौरान उन्होंने शर्त रखी थी कि वे अपने पुराने कानूनों का ही पालन करेंगे। इसी नियम व कानूनी प्रावधान के कारण सिक्किम के लोगों को टैक्स नहीं देना पड़ता। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सिक्किम के सभी निवासी इनकम टैक्स (Sikkim me income tax rule)दायरे से बाहर रहेंगे। केवल नौकरी, खेती व कारोबार से होने वाली इनकम को लेकर ही यह नियम नहीं है, बल्कि यहां के लोगो को सिक्योरिटीज और डिविडेंड से होने वाली आय पर भी टैक्स नहीं देना पड़ता है। इस छूट का लाभ उन सभी नागरिकों को मिलता है, जो विलय से पहले सिक्किम (Sikkim me income tax kyo nahi lgta)के निवासी थे।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...