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एक रात के लिए ही क्यों होती है किन्नरों की शादी | जानिये...

एक मनुष्य का जीवन तलवार की नोक पर चलने के समान है क्योंकि इंसान को अपने जीवन में कदम-कदम पर परीक्षा देनी पड़ती है | लेकिन इसी जीवन में यदि किसी व्यक्ति की शादी की बात की जाए तो इससे बढ़कर कोई भी ख़ुशी उसके लिए नहीं हो सकती है | क्योंकि इस कठोर जीवन में उसका साथ देने के लिए उसकी पत्नी होती है | 

लेकिन अपने जीवन में मनुष्य जाति ही विवाह नहीं करती है बल्कि किन्नर जाति भी विवाह करती है | आमतौर पर ये देखा गया है की किन्नर अपनी दुनिया में अकेले ही होते है | उनके जीवन में उनका साथ देने वाला और कोई नहीं होता है | उनकी केवल एक ही क्षमता होती है और वो है उनकी एकजुटता | 

जब समाज में किसी नए किन्नर का जन्म होता है तो सारे किन्नर उसे काफी धूमधाम से मानते है | यदि किसी किन्नर की मृत्य हो जाए तो अलग-अलग स्थानों से काफी संख्या में किन्नर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आते है | हम सभी यही जानते है की एक किन्नर कि शादी नहीं होती है | लेकिन हमारी ये मान्यता गलत है | 

आज हम आपको बताने वाले है की एक किन्नर की भी शादी होती है लेकिन वह सिर्फ एक दिन के लिए ही विवाहित होती है | अगले दिन वह विधवा हो जाती है | दरअसल, ये प्रथा महाभारत के समय से चली आ रही है | जब पांडवों को एक विशेष युद्ध पर जाने के लिए एक राजकुमार की बलि देनी थी | 

इस दौरान पांडवों ने कई प्रयास किये लेकिन कोई भी राजकुमार बलि देने के लिए तैयार नहीं हुआ। लेकिन, इरावन इस बलि के लिए तैयार हो गया | हम आपको बता दे की इरावन धनुर्धर अर्जुन और नाग कन्या उलूपी का पुत्र था | लेकिन, उसकी एक शर्त थी कि वह बलि से पहले विवाह करना चाहेगा, अर्थात बिना विवाह किए वह बलि नहीं देगा। अब राजा युधिष्ठिर चिंतित हो गए | क्योंकि, एक दिन के लिए इरावन से शादी कौन करता।

इसके लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप धारण किया और इरावन से विवाह किया | इसके बाद इरावन की जब बलि दी गयी तो,शादी के अगले ही दिन मोहिनी रूपी श्री कृष्ण विधवा हो गए | इसके बाद उन्होंने विलाप भी किया और विधवा रूप में सभी रीति-रिवाजों का पालन भी किया। 

इसी घटना की याद में किन्नर जाति भगवान श्री कृष्ण का स्वयं को मोहिनी रूप मानती है और इरावन रुपी प्रतिमा से शादी करती है | जब एक दिन गुजर जाता है तो विवाहित किन्नर ही इरावन की प्रतिमा को तोड़ देती है | इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की तरह ही विलाप करती है |

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