Skip to main content

स्कॉर्पियो-थार नहीं बल्कि भारत में सबसे ज्यादा खरीदी जाती है ये गाड़ी, जानें 5 कारण क्यों है सबसे बेस्ट Auto News

Gazab Viral: Auto News:-

 


Best Cars in India: भारतीय बाजार में आज के समय में आपको एक से बढ़कर एक दमदार कार देखने को मिल जाएगा। वहीं, इन दिनों कार खरीदना एक ट्रेंड सा भी बन गया है। इसी कारण बीते कुछ सालों में कारों की खरीदारी के मामले में एक बंपर उछाल देखने को मिला है। लेकिन क्या आपके मन में कभी ये सवाल आया है कि आखिर वो कौनसी कार है जिसे भारत में लोग सबसे ज्यादा पसंद (Best Cars in India) करते हैं या फिर भारत में ज्यादातर लोग कौन सी कार खरीदतें हैं अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल आते हैं तो आईए हम आपको इसका जवाब देते हैं।

भारत की बेस्ट कार है वैगन-आर

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास छोटी कारों से लेकर प्रीमियम लेवल तक की गाड़ियों की भरमार है। ये कंपनी अपने ग्राहकों को हर प्राइस रेंज पर (Best Cars in India) एक बेहतरीन कार ऑफर करती है। और यही कारण भी है कि भारत में सबसे ज्यादा कारें भी इसी कंपनी की बिकती है। वैसे तो कंपनी के पास मॉडलों की कमी नहीं है लेकिन आंकड़ों की माने तो इस कंपनी की वैगन-आर ही वो गाड़ी है जो भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली (Best Cars in India) कार है।

हालांकि, ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में ये कार बुरी तरह फ्लॉप नजर आई है, साथ ही इसे एडल्ट सेफ्टी में भी केवल एक स्टार रेटिंग मिली है जबकि चाइल्ड सेफ्टी में तो इसे जीरो स्टार रेटिंग मिली है। लेकिन फिर भी ये गाड़ी भारत के लोगों की पहली पसंद बनी हुई है (Best selling car)। हालांकि इस गाड़ी में कुछ ऐसे फीचर्स भी हैं जिसके कारण लोग इसकी खामियों को नजरअंदाज कर इसपर अपना भरोसा जताते हैं।

कार का किफायती इंजन

इस कार में ग्राहकों को दो इंजनों का ऑप्शन मिलता है।  इसमें एक तो 1.0 लीटर का पेट्रोल इंजन मिलता है और इसके साथ ही इसमें 1.2 लीटर के दूसरे इंजन काऑप्शन भी मिलता है। इसके साथ ही इसमें सेफ्टी के लिए ABS, रियर पार्किंग सेंसर के साथ साथ स्पीड अलर्ट सिस्टम भी मिलता है, इसके साथ ही ग्राहकों को इसमें CNG का ऑप्शन भी मिलता है (Best Cars in India) माइलेज की बात करें तो ये पेट्रोल मोड पर 25.19 km/l और सीएनजी मोड पर 33.47 km/kg की किफायती माइलेज देती है।

ड्राइव करने में आसान

ऐसा माना जाता है कि बाकी दूसरी कारों के मुकाबले वैगन-आर (Best Cars in India) को ड्राइव करना ज्यादा आसान है। आप अपने आसपास के शहरों में इससे आसानी से ट्रेवल कर सकते हैं। वहीं अगर आप हाइवे पर इस कार को भगाना चाहते हैं तो भी ये कार 80 से 100kmph की स्पीड तक आराम से दौड़ सकती है।

एक्सट्रा स्पेस  

भारतीय लोगों की पहली पंसद होती है वो कारें जिनमें ज्यादा सामान कैरी किया जा सके। वहीं लोगों की ये जरूरत पूरी करती है मारुति वैगन-आर, दरअसल इस प्राइज रेंज की अन्य कारों के मुकाबले इस कार में सबसे ज्यादा स्पेस मिलता है। इस कार (Best Cars in India) में 5 लोग आसानी से बैठ सकते हैं। वहीं लेगरूम और हेडरूम के लिए जगह की भी कोई दिक्कत नहीं है। इसके साथ ही आपको कार में  341 लीटर का बूट स्पेस भी मिलता, जहां आप बेफिकर होके काफी सारा सामान रख सकते हैं।

बड़ा सर्विस नेटवर्क

भारत में लोग  वैगन-आर (Best Cars in India) को इसलिए भी खरीदना पसंद करते हैं क्योंकि दूसरे कंपनियों की तुलना में मारुति का सर्विस नेटवर्क सबसे बड़ा है। हाल ही में कंपनी ने अपना 5,000 वां सर्विस टचप्वाइंट खोला है। इसके साथ ही इस कार को खरीदने का सबसे बड़ा फायदा ये भी है कि इसके स्पेयर्स पार्ट्स आपको बाजार में आसानी से मिल जाते हैं।

लाखों लोगों का भरोसा

मारुति ने पहली बार वैगन-आर को साल 1999 में लॉन्च किया था और तबसे लेकर आज तक इस कार (Best Cars in India) को भारत के लोगों द्वारा खूब पंसद किया जाता है। पूरे भारत में इस कार (Best Cars in India) के 30 लाख से भी ज्यादा ग्राहक हैं। लोग इस ब्रैंड पर और इस कार पर काफी भरोसा करते हैं, जिसके कारण ही भारत में लोग सबसे ज्यादा इसी कार को खरीदते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...