Skip to main content

Rajdoot 2.0: लॉन्च होते ही पापा लेंगे राजदूत 2.0 शोरूम, उड़ जाएंगे बुलेट के तोते




दो दशक पहले एक ऐसी बाइक आई थी जिसने अपनी आवाज और सड़कों पर मौजूदगी से हर किसी का दिल जीत लिया था। वह बाइक अब वापसी के लिए तैयार है और इसका नाम राजदूत (राजदूत 2.0) है। यह बाइक करीब बीस साल पहले तक भारत की सबसे प्रिय बाइकों में से एक थी। हालाँकि, अपडेट न होने के कारण बाज़ार ने इसे पसंद करना बंद कर दिया और एक समय ऐसा आया जब राजदूत को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। लेकिन पिछले कुछ सालों में स्पोर्ट्स और क्रूजर बाइक्स की बढ़ती मांग को देखते हुए राजदूत के निर्माताओं ने इसे दोबारा लॉन्च करने का फैसला किया है।

आप सोच रहे होंगे कि क्या इसे उसी पुराने अंदाज में पेश किया जाएगा. गौरतलब है कि ऐसा नहीं है. बाइक का लुक पुराने मॉडल से लिया जा सकता है, जबकि बाकी फीचर्स और इंजन नया होगा। यह नए उत्सर्जन मानदंडों के अनुसार अपडेटेड इंजन के साथ आएगा। यह पांच-स्पीड गियरबॉक्स से लैस होगा। राजदूत के नए मॉडल में 250cc से 350cc के बीच का इंजन हो सकता है और यह लिक्विड कूलिंग सिस्टम के साथ आएगा। फीचर्स की बात करें तो इसमें ब्रेकिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए दोनों टायरों में डिस्क ब्रेक के साथ सिंगल-चैनल ABS हो सकता है। माना जा रहा है कि टॉप मॉडल में डुअल-चैनल एबीएस होगा। एक्सपर्ट की राय से पता चलता है कि राजदूत की दोबारा एंट्री से क्रूजर सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

बता दें कि इस बाइक का पिछला मॉडल एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने बनाया था। उस वक्त इस बाइक में 173cc का टू-स्ट्रोक इंजन था। यही कारण है कि हर कोई पहचान सकता था कि राजदूत आ रहा है। एक बार फिर यह अपने पुराने आकर्षण से नए दिलों पर राज करने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक यह बाइक अगले साल के मध्य में लॉन्च हो सकती है और इस पर अभी काम शुरू हो गया है।

अंत में, राजदूत 2.0 की वापसी का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, और मोटरसाइकिल प्रेमी यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि इस प्रतिष्ठित बाइक में उनके लिए क्या है। अपने क्लासिक डिजाइन और नए व बेहतर फीचर्स के साथ यह भारतीय बाजार में दोबारा धमाकेदार एंट्री करने के लिए तैयार है। राजदूत 2.0 के लॉन्च और फीचर्स के बारे में अधिक अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...