Skip to main content

स्मार्टफोंस को रिप्लेस करने आया Humane AI Pin, फीचर्स ऐसे हथेली बन जाएगी स्क्रीन, देखिए इसकी कीमत


Humane AI Pin: बीते कुछ महीनों से Ai ने पूरी टेक्नोलॉजी मार्केट में अपना दबदबा बना लिया है। लगभग हर टेक कंपनियां इस रेस में हिस्सा लेने के लिए अपनी हर एक कोशिश में लगी हुई हैं। इसके अलावा स्मार्टफोन कंपनियां भी अपने डिवाइसेज में एआई फीचर्स को पेश कर रही है। वहीं ह्यूमेन ने अपना पहला हार्डवेयर AI Pin को लॉन्च कर दिया है , जिसे कपड़ों में भी चिपकाया जा सकता है।


ये एक ऐसी Ai डिवाइस पेश की गई है जो स्मार्टफोन को रिप्लेस कर सकती है। आपको बता दें, एपल के पूर्व कर्मचारी इमरान चौधरी और बेथनी बोंगियोर्नो ने एक ऐसे डिवाइस को पेश की है, जिसे आपके कपड़ों पर पिन की तरह चिपकाया जा सकता है।

वहीं ह्यूमन ने X पर जानकारी पोस्ट करते हुए कहा इसकी शिपिंग मार्च 2024 से स्टार्ट हो जाएगी।

इतनी होगी इसकी कीमत


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बात करें इसके कीमत की तो इस डिवाइस को आप 699 डॉलर यानी लगभग 58,294 रुपये में खरीद सकते है। इसके लिए 24 अमेरिकी डॉलर का मंथली सब्सक्रिप्शन लेना होगा। इसमें आपको सेल्युलर डेटा और मोबाइल नंबर भी शामिल होगा। यह डिवाइस तीन कलर वेरिएंट में लॉन्च किया है। वहीं इसके पहले वेरिएंट की एमआरपी 699 अमेरिकी डॉलर है। लेकिन अन्य दो वेरिएंट का प्राइस 799 अमेरिकी डॉलर है।

Humane AI Pin के क्या हैं खास फीचर्स


खबरों के अनुसार, कहा जा रहा हैं ये एक वियरेबल डिवाइस है, जो AI सपोर्ट के साथ आता है। इसमें आपको OpenAI का GPT-4 और Microsoft के AI मॉडल पर आधारित डिजिटल असिस्टेंट को भी सपोर्ट मिलता है। इस नया एआई पिन में एक कॉम्पैक्ट, एआई-पॉवर्ड डिवाइस है जिसे कपड़ों में आसानी से लगाया जा सकता हैं। जिसे मैग्नेट के सहारे आसानी से कपडे में चिपकाया जा सकता है।

इतना ही नहीं इसमें आपको एक प्रोजेक्टर और माइक्रोफोन, स्पीकर, कैमरा, बैटरी और सेंसर मिलता हैं। इस डिवाइस का इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी ऐप या स्क्रीन की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि इसे आप वॉइस, जेस्चर, टच और लेजर इंक की मदद से यूज कर सकते हैं। ये डिवाइस Humane के OS पर काम करता है।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...