Skip to main content

Mehsana Breed Buffalo: कमाई करने का सबसे बड़ा जरिया बन रही ये भैंस, पैसों से कर देगी मालामाल, 6 महीने में लखपति

 Mehsana Breed Buffalo: हमारा देश कृषि प्रधान देश है जहां पर किसान दिन रात मेहनत करके अनाज उपजाकर लोगों को पेट भरते है। किसानों के लिए यह व्यावसाय़ भी काफी फायदेमंद साबित हुआ है। लेकिन इसके साथ साथ पशुपालन उधोग से भी वो पैसा कमाने में की कसर नही छोड़ते है।

जिसके ले अब सरकार भी काफी मदद कर रही है। यदि आप भी बेरोजगार है और कम पैसों में ज्यादा कमाई करने की सोच रहे है तो आपको लिए आज के समय में दूध का व्यवसाय सबसे अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। अब तो इस फायदा ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा शहरी लोग ज्यादा उठा रहे हैं

यदि आप भी इस व्यवसाय को करना चाह रहे है तो इसके लिए हम बता रहे है ऐसे भैसों का नाम जिनके पालन से आप काफी कमाई कर सकते है। इस व्यवसाय में आपको कम निवेश में अच्छा मुनाफा हो सकता है। आज हम आपको यहाँ तीन ऐसी नस्लों की भैंस के बारे में बता रहें हैं। जिनसे आप प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध पा सकते हैं।

मुर्रा नस्ल की भैंस

यदि आप पशुपालन उधोग का छोटा सा बिजनिस करना चाह रहे है तो इसके लिए आप अपने घर पर मुर्रा नस्ल की भैंस को लाकर रखें। यह भैंस की सबसे अच्छी नस्ल मानी जाती है। जो एक बार में आपको प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध प्रदान करती है। इस नस्ल की भैंस का वजन 450 से 500 किग्रा के बेच होता है। इसकी पहली बयात 40 से 42 माह की होती है। इसकी दूसरी बयात 15 से 16 माह की होती है। बयात के समय इस नस्ल की भैंस 5500 से 6000 लीटर दूध प्रदान करती है तथा प्रतिदिन यह 65-80 लीटर दूध प्रदान करती है।

जाफराबादी नस्ल की भैंस

जाफराबादी नस्ल की भैंस भी आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। इसका पालन हमारे देश में अधिकतर लोग करते है। यह भैंस काफी ज्यादा दूध देती है इस नस्ल की भैंस का वजन 550 किग्रा के आसपास होता है। इसकी पहली बयात 45-47 महीने की होती है तथा दूसरी बयात 16-17 महिने की होती है। बयात के समय यह भैंस आपको 4000 से 5000 लीटर दूध प्रदान करती है। प्रतिदिन यह आपको 65-70 लीटर दूध देती है।

मेहसाना नस्ल की भैंस

अब अच्छी नस्ल की भैंस में मेहसाना नस्ल की भैंस का नाम भी सबसे टॉप लिस्ट में गिना जाता है। क्यकि इस बैंस के दूध की क्वालिटी सबसे अच्छी होती है। इस भैंस का वजन 500-560 किग्रा के लगभग होता है। इसकी पहली बयात 46 महिने तथा दूसरी बयात 15-16 महिने की होती है। बयात के दौरान यह आपको 3500 से 4000 लीटर दूध प्रदान करती है। इसके अलावा यह प्रतिदिन आपको 70 से 80 लीटर दूध प्रदान करती है।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...