Skip to main content

केसर के ये अचूक टोटके चमका देंगे किस्मत, छप्पर फाड़कर होगी कमाई!

केसर, जिसे हम अक्सर हल्वा, दूध, और बिरयानी में इस्तेमाल करते हैं, वह सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि एक ऐसा रत्न भी है जिसे ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण माना जाता है। केसर को खाने से न तो सिर्फ स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके साथ ही, ज्योतिष शास्त्र में केसर से जुड़े कई सारे उपाय बताए गए हैं जिनका पालन करने से आपके जीवन में सुख, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति हो सकती है।


केसर और चांदी की कटोरी

अगर आपके जीवन में सुख, समृद्धि, और सफलता नहीं है, तो आपको चांदी की कटोरी में केसर लेकर उसका तिलक बनाना चाहिए। इसके बाद, आपको अपने आराध्य देवता को समर्पित करना चाहिए और फिर उनके प्रसाद के रूप में इस केसर का तिलक अपने माथे पर लगाना चाहिए। यह आपके जीवन को सुखमय बना सकता है।

कमजोर ग्रह गुरु को मजबूती देने का उपाय

अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है और शुभ फल नहीं दे रहा है तो जातक को गुरुवार के दिन केसर के उपाय करनी चाहिए। गुरुवार के दिन केसर का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपको सभी कामों में सफलता मिलती है।

केसर के चमत्कारिक उपाय

केसर को शुद्ध और पवित्र माना गया है केसर में सफेद कौड़ियों को रंगने के बाद उसे लाल रंग के कपड़े में बांध दे उसके बाद तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से आप के घर में खुद मां लक्ष्मी दौड़ी चली आएंगी।

बात-बात पर झगड़ा

जिन लोगों के घर में बार-बार पर झगड़ा होता है उन्हें अपने रिश्ते को सुधारने के लिए माथे, दिल और नाभि पर केसर का तिलक करें। केसर मिला दूध शिवलिंग पर अर्पित करें ऐसा करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है।

केसर के उपायों का पालन करने से आपके जीवन में सुख, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति हो सकती है। यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है या आपके घर में झगड़े होते हैं, तो केसर के ये उपाय आपके जीवन को सुखमय बना सकते हैं। याद रखें, ये उपाय श्रद्धा और विश्वास के साथ किए जाने चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...