नई दिल्ली:नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जाता है कि सामूहिक बलात्कार की यह वारदात रेलवे स्टेशन के किसी अंधेरे इलाके में नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म पर ही हुई। जहां एक रूम में एक महिला के साथ दो लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो इनका साथ देने वाले आरोपी हैं। चारों आरोपी रेलवे के कर्मचारी बताए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पीड़िता महिला की उम्र 28 से 30 साल के बीच है। उसकी यहां आरोपियों में से एक से कुछ समय पहले जान-पहचान हुई थी। गुरुवार-शुक्रवार रात को एक आरोपी ने पीड़ित महिला को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर किसी बहाने से बुला लिया। इसके बाद आरोपी उसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-8/9 पर बने एक कमरे में ले गया। यह कमरा प्लेटफॉर्म पर फुटओवर ब्रिज के नीचे इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट और अन्य विभाग द्वारा इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है, जिसमें कुछ उपकरण भी लगे हैं।
नई दिल्ली। भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...
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