Skip to main content

बिहार को मिलने जा रहा है दूसरा तारामंडल, जानिए किस जिले में हो रहा है निर्माण




देश का सबसे पहला तारामंडल कोलकाता में बनाया गया था। वही बिहार का पहला तारामंडल और बिहार का एकमात्र तारामंडल बिहार की राजधानी पटना में अभी स्थित है, लेकिन अब जल्दी बिहार का दूसरा तारामंडल में आपको सितारों को नजदीक से निहारने का मौका मिलने वाला है। क्योंकि बिहार का दूसरा तारामंडल जो बिहार का सबसे हाईटेक तारामंडल होगा उसका निर्माण अपने अंतिम चरण में है।
बिहार के इस राज्य में बन रहा हाईटेक तारामंडल

बिहार का सबसे हाईटेक तारामंडल और बिहार का दूसरा तारामंडल बिहार के दरभंगा में बनाया जा रहा है इस तारामंडल को बिहार के दरभंगा के राजकीय पॉलिटेक्निक के मैदान में इसका निर्माण बहुत तेजी से किया जा रहा है।
क्या कहते है अधिकारीBihar’s second planetarium

आपको यह भी बता दूँ कि इसकी जानकारी देते हुए बिहार बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के एमडी कुमार रवि ने कुछ तस्वीर साझा करके बताया कि “कल दरभंगा स्थित तारामंडल स्थल का भ्रमण किया। बीसीडी द्वारा निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, और इस वर्ष के अंत में पूरा होने की संभावना है। इसमें 150 क्षमता वाले गुंबद के आकार का मेन हॉल, ओरिएंटेशन हॉल, विज्ञान प्रदर्शन और अन्य सुविधाएं हैं।”
इस हाई टेक तारामंडल में ये सभी सुविधा दी जाएगी

इसका मतलब साफ है कि इस हाईटेक और भव्य तारामंडल को इस साल के अंत तक शुरू किया जा सकता है, वही तारामंडल की खासियत की बात करें तो इसमें आपको तारामंडल के साथ-साथ इसमें आधुनिक रेस्टोरेंट, मार्केट, कॉन्प्लेक्स, म्यूजियम, बनाया जा रहा है। इसके साथ यह तारामंडल पूरी तरह से डिजिटल होगा, जहां पर आपको प्लेटोरियम ग्लोब सर्किल पूरी तरह से डिजिटल और बिल्कुल गोलाकार होगा इस तारामंडल को 74 करोड़ की लागत से निर्माण किया जा रहा है। 

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...