Skip to main content

बिहार मे बिछेगा रेलवे लाइन का जाल, कई जिलों सहित इस राज्य के लिए होगी डायरेक्ट रेलमार्ग




केंद्र सरकार व बिहार सरकार के स्तर पर प्रदेश की अन्य राज्यों से कनेक्टिविटी विस्तार के लिए कई कार्य जारी हैं. एक्सप्रेसवे से लेकर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. इसके साथ ही रेलवे भी अपनी सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही संपर्कता के लिए विशेष कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है. इसी क्रम में लगभग 206 किलोमीटर लंबे सकरी-निर्मली एवं झंझारपुर-लौकहा बाजार और सहरसा-फारबिसगंज में आमान परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है. इन्हीं में एक है सकरी-निर्मली-झंझारपुर-लौकहा बाजार एवं सहरसा- फारबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत तमुरिया-घोघरडीहा की करीब 11 किमी रेल लाइन, घोघरडीहा-निर्मली की भी करीब 11किमी रेल लाइन, और ललितग्राम-नरपतगंज-फारबिसगंज की 29 किमी की रेल लाइन. इस कार्य को वर्ष 2022 में ही पूरा कर लिए जाने की संभावना है. फारबिसगंज तक रेल कनेक्टिविटी होने के बाद जोगबनी, कटिहार और गुवाहाटी से कोसी-मिथिला का सीधा रेल संपर्क उपलब्ध हो जाएगा.

बता दें कि पूर्व मध्य रेल द्वारा नई लाइन, दोहरीकरण, आमान परिवर्तन सहित कई निर्माण परियोजनाओं पर कार्य तेज गति से जारी है. इसी क्रम में लगभग 206 किलोमीटर लंबे सकरी-निर्मली तथा झंझारपुर-लौकहा बाजार की 94 किमी रेल लाइन एवं सहरसा-फारबिसगंज की 111 किमी रेल लाइन पर आमान परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है. इस परियोजना पर लगभग 1471 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

लगभग 94 किलोमीटर लंबे सकरी-निर्मली तथा झंझारपुर-लौकहा बाजार आमान परिवर्तन परियोजना में से सकरी-मंडन मिश्र हॉल्ट जो कि 11 किमी लंबी है, मंडन मिश्र हॉल्ट-झंझारपुर करीब 09 किमी, झंझारपुर-तमुरिया के बीच 09 किमी का कार्य पूरा हो चुका है एवं शेष पर कार्य तीव्रगति से जारी है.

इसी तरह 111 किलोमीटर लंबे सहरसा-फारबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत अब तक सहरसा- गढ़बरूआरी करीब 16 किमी, गढ़बरूआरी-सुपौल लगभग 11 किमी, सुपौल-सरायगढ़ के बीच 25 किमी, सरायगढ़-राघोपुर के बीच, 11 किमी एवं राघोपुर-ललितग्राम के बीच 20 किमी रेलखंड सहित अब तक कुल 83 किमी आमान परिवर्तन का कार्य पूरा कर लिया गया है. इस परियोजना का शेष कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा.

सकरी-निर्मली-झंझारपुर-लौकहा बाजार एवं सहरसा- फॉरबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत तमुरिया-घोघरडीहा 11 किमी रेल लाइन, घोघरडीहा-निर्मली 11किमी रेल लाइन, ललितग्राम-नरपतगंज-फॉरबिसगंज 29 किमी रेल लाइन का कार्य वर्ष 2022 में पूरा कर लिए जाने की संभावना है.

फारबिसगंज तक रेल कनेक्टिविटी होने के बाद जोगबनी, कटिहार और गुवाहाटी से कोसी-मिथिला का सीधा रेलसंपर्क उपलब्ध हो जाएगा. फारबिसगंज होकर जोगबनी, कटिहार और गुवाहाटी से कोसी-मिथिलांचल से जुड़ जाएगा. झंझारपुर, निर्मली रूट की ट्रेन कोसी रेल महासेतु, सरायगढ़ और राघोपुर होकर फारबिसगंज पहुंच जाएगी. दरभंगा एवं सहरसा क्षेत्र के लोगों को गुवाहाटी के लिए वैकल्पिक रेलमार्ग उपलब्ध हो जाएगा. इन्हे भी जरूर पढ़ें

Shimla, Mandi, Kangra, Chamba, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, #बिहार, #मुजफ्फरपुर, #पूर्वी चंपारण, #कानपुर, #दरभंगा, #समस्तीपुर, #नालंदा, #पटना, #मुजफ्फरपुर, #जहानाबाद, #पटना, #नालंदा, #अररिया, #अरवल, #औरंगाबाद, #कटिहार, #किशनगंज, #कैमूर, #खगड़िया, #गया, #गोपालगंज, #जमुई, #जहानाबाद, #नवादा, #पश्चिम चंपारण, #पूर्णिया, #पूर्वी चंपारण, #बक्सर, #बांका, #बेगूसराय, #भागलपुर, #भोजपुर, #मधुबनी, #मधेपुरा, #मुंगेर, #रोहतास, #लखीसराय, #वैशाली, #शिवहर, #शेखपुरा, #समस्तीपुर, #सहरसा, #सारण #सीतामढ़ी, #सीवान, #सुपौल,

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...