Skip to main content

देश में अनलाॅक को लेकर आई अच्छी खबर, 1 जून से होगा शुरु, आप भी जान लें



नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ने लगी है और नए मामलों में लगातार कमी देखी जा रही है. इसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने धीरे-धीरे लॉकडाउन खत्म करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली में अनलॉक प्रक्रिया 31 मई से चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी.

कंस्ट्रक्शन गतिविधियों और फैक्ट्रियों को खोलने का आदेश
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया, ‘एलजी की अध्यक्षता में लॉकडाउन खोलने को लेकर मीटिंग हुई. दिल्ली में 31 मई से निर्माण गतिविधियों की बहाली और कारखानों को दोबारा खोलने की अनुमति दी जाएगी.’ उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में संक्रमण दर घटकर 1.5 प्रतिशत हो गई है. लेकिन वायरस के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.’

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘करोड़ों लोगों की मेहनत का नतीजा है कि दिल्ली में अब कोरोना केस धीरे धीरे कम हो रहे है. अब धीरे-धीरे अनलॉक करने का समय है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा ना हो कि कोरोना से लोग बच जाए और भूखमरी से मर जाए, इसलिए अब आर्थिक गतिविधियों को शुरू करना जरूरी है. इस प्रक्रिया में हमें निचले वर्ग – दिहाड़ी मजदूर, श्रमिकों, प्रवासी कामगारों का सबसे पहले ध्यान रखना होगा.’

जनता के सुझाव के बाद लेंगे आगे का फैसला: केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘जनता के सुझाव और एक्सपर्ट की सलाह से आगे धीरे-धीरे लॉकडाउन खोलेंगे, बशर्ते कोरोना के नए मामले ना बढ़े. हम लॉकडाउन नहीं लगाना चाहते है. लेकिन अगर कोरोना बढ़ेगा तो फिर बंद करना पड़ेगा.’ उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, ‘हम सभी को मिलकर एहतियात बरतना होगा. आपको अगर जरूरत ना पड़े तो घर से बाहर ना निकलें. ताकि दिल्ली को और अपने देश को बचाया जा सके.’

बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना केसों (Coronavirus in Delhi) में लगातार कमी आ रही है और पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1072 केस आए हैं, जबकि 117 मौतें दर्ज की गई. 30 मार्च के बाद एक दिन में सबसे कम मामले सामने आए हैं, वहीं 15 अप्रैल के बाद सबसे कम मौत का आंकड़ा हैं. बता दें कि दिल्ली में 30 मार्च को 992 केस सामने आए थे, वहीं 15 अप्रैल को राजधानी में 112 संक्रमितों की मौत हुई थी. दिल्ली में संक्रमण दर घटकर 1.53 फीसदी हो गई है, जो 24 मार्च के बाद सबसे कम है. 24 मार्च को दिल्ली में संक्रमण दर 1.52 फीसदी थी.  निचे दी गयी ये खबरें भी जरूर पढ़ें

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...