Skip to main content

घर में जब भी लाए नमक तो जरूर अपनाएं ये टोटका होगा लाभ ही लाभ



नमक के बिना खाने का आनंद हम कभी उठा नहीं सकते। जब तक खाने में स्वादानुसार नमक ना डाला जाए, तब तक भोजन करने का मजा ही नहीं आता। इसलिए इस मामले में तो नमक बेहद जरूरी है। डॉक्टर की राय में भी नमक हमारे शरीर के लिए जरूरी है। क्योंकि इसमें आयोडीन होता है जो हमारे शरीर के मैटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखता है।

साथ ही यदि शरीर में नमक की कमी हो जाए तो हमारा रक्तचाप गिरने लगता है, हम कमजोर महसूस करने लगते हैं। इसलिए नमक का महत्व हमारे जीवन में काफी अधिक पाया गया है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में भी नमक महत्वपूर्ण है, यह आपने पहले कभी नहीं जाना होगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नमक में गजब की शक्ति होती है जो न सिर्फ आपके घर को सकारात्मक उर्जा से भर देती है बल्किी आपके घर में सुख समृद्धि भी बढ़ाने का काम करती है। आज ऐसा ही उपाय हम आपको बताने जा रहे हैं जिससे आपको लाभ ही लाभ होगा। जब भी आप अपने घर में नमक खरीद कर लाते हैं तो आप यह उपाय जरूर करें इसके करने से आपको बहुत लाभ होगा।

आप जब नमक लाते हैं तो उसमें सबसे पहले आप एक लौंग मिलाकर रख दें और दूसरा उपाय यह है कि उसे परमात्‍मा के समक्ष भोग लगाए।

नम‍क में लौंग रखने का कारण यह है कि परिवार के जितने भी सदस्‍य उस नमक का सेवन करेंगे उनकी बॉडी को पोजिटिव वाइबरेशन मिलेगी।

परमात्‍मा के भोग लगाने का कारण यह है कि ये नमक भोग लगाने के बाद प्रसाद बन जाता है जिसके बाद उसे जिस किसी चीज में डाला जाता है वह प्रसाद बन जाता है और वो पवित्र हो जाता है।

अब सवाल ये उठता है कि जिसके घर में नॉनवेज बनता है वो इस नमक का प्रयोग कैसे करें तो बताते दें कि नॉनवेज का प्रयोग करने वाले लोग इस नमक को उसमें न डाले और वो सिर्फ लौंग का ही प्रयोग करें और वेज खाने वाले लोग है वो निश्चिंत होकर भोग लगाएं नमक का प्रयोग करें इससे आत्‍मा पवित्र रहेगी।

ये प्रथा आज की नहीं बल्कि राजा महराजा से चली आ रही प्रथा है इसका प्रयोग राजाओं के घर में किया जाता था जिससे उनके शरीर में एक पोजिटिव वाइबरेशन बना रहता था।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...