Skip to main content

21 की उम्र में ऐसे करोड़पति बना ये 8th फेल लड़का, आज CBI भी लेती है मदद

21 की उम्र में ऐसे करोड़पति बना ये 8th फेल लड़का, आज CBI भी लेती है मदद
आज देश में जानलेवा ऑनलाइन ब्लू व्हेल गेम लगातार सुर्खियों में है। सरकार, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स, साइबर टीम, एथिकल हैकर्स आदि इस बात का पता लगाने में जुटे हुए हैं कि ये गेम लोगों तक कैसे पहुंच रहा है जो कि सभी के लिए हानिकारक बनता जा रहा है। आज हम आपको एक ऐसे एथिकल हैकर्स के बारे में बता रहे हैं, जो 8th क्लास में फेल हो गया थाजिसके कारण उसे घर से बहुत डांट पढ़ी थी। इस लड़के की टीएसी सिक्युरिटी नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी आज करोड़ों कमा रही है। बता दें कि इस लड़के ने अपने शौक को बिजनेस का रूप दिया जिस कारण वो आज यहां तक पहुंचा है। क्या करते हैं त्रिशनित…

लड़के की उम्र मात्र 23 साल है जिसका नाम त्रिशनित अरोड़ा हैं। त्रिशनित लुधियाना की मिडिल क्लास फैमिली से बिलांग करते हैं, जिनकी बचपन से ही पढ़ाई में कम और कंप्यूटर में ज्यादा दिलचस्पी थी। त्रिशनित दिनभर कंप्यूटर में हैकिंग का काम सीखते थे, जिस कारण वे पढ़ाई से दूर रहे और 8th क्लास में फेल हो गए। 8th के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन आगे चल कर उन्होंने 12th के एग्जाम दिए। वे एक एथिकल हैकर है जिसमें नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी इवैल्युएट की जाती है। इनकी निगरानी सर्टिफाइड हैकर्स करते हैं, जिससे कि किसी नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी कॉन्फिडेन्शियल ही रहे।CBI की टीम के साथ त्रिशनित अरोड़ा।

दोस्तोंं ने उड़ाया मजाक


त्रिशनित आठवीं कक्षा में फेल हो गए जिसके बाद उनका परिवार उनसे बेहद खफा था. इतना ही नहीं उनके दोस्त और स्कूल में पढ़ने वाले छात्र भी उनका मजाक उड़ाने लगे, इसके बाद अरोड़ा ने रेग्युलर पढ़ाई छोड़कर 12वीं तक कॉरेस्पॉन्डेंस से पढ़ाई की.

घर वालों को नहीं पसंंद आया त्रिशनित का काम

त्रिशनित एक आम परिवार में जन्में थे, ऐसे में घर वालो को उनका काम पसंंद नहीं आया. त्रिशनित के पिता अकाउंटेंट थे लिहाजा उन्हें अपने बेटे का यह एथिकल हैकिंग वाला काम बिल्कुल भी पसंद नहीं था, लेकिन अरोड़ा कंप्यूटर में अपने शौक को ही कॅरियर बनाने का फैसला कर चुके थे.



CBI से लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज भी है इनकी क्लाइंट

– दो साल पहले जब उनकी उम्र 21 वर्ष थी, उन्होंने टीएसी सिक्युरिटी नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी बनाई।

– त्रिशनित अब रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कंपनियाें को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं।

– वे ‘हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा’ ‘दि हैकिंग एरा’ और ‘हैकिंग विद स्मार्टफोन्स’ जैसी किताबें लिख चुके हैं।

दुबई-यूके में वर्चुअल ऑफिस, ऐसे मिली ट्रेनिंग

– दुबई और यूके में कंपनी का वर्चुअल ऑफिस है। करीब 40% क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं।

– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में 50 फॉर्च्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। जिससे उनकी कंपनी को करोड़ों का टर्नओवर होता है।

– सेल्फ स्टडी और पिता के साथ एक्स्पेरिमेंटिंग से तैयार हुए, यूट्यूब के वीडियो से भी हेल्प मिली।

– इन्होंने नॉर्थ इंडिया की पहली साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम सेटअप किया।

मिल चुके हैं कई अवॉर्ड
उनके काम को लेकर वर्ष 2013 में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने उन्हें सम्मानित भी किया था. वर्ष 2014 में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गणतंत्र दिवस पर स्टेट अवॉर्ड दिया और वर्ष 2015 में उनको फिल्म एक्टर आयुष्मान खुराना सहित सात हस्तियों के साथ पंजाबी आइकन अवॉर्ड दिया गया था.2014 में पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल ने गणतंत्र दिवस पर ‘स्टेट अवाॅर्ड ’ दिया।

दो हजार करोड़ के टर्नओवर पर नजर
अब त्रिशनित की नजर कंपनी के बिजनेस को यूएस ले जाने की है. उन्होंने इसी साल जनवरी में दिए एक अलग इंटरव्यू में कहा था कि वे कंपनी का टर्नओवर बढ़ाकर इसे दो हजार करोड़ रुपए तक ले जाना चाहते हैं. दुनियाभर की 500 कंपनियां इस वक्त त्रिशनित की क्लाइंट है

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...