Skip to main content

50 हजार की लागत में ऐसे शुरु करें गोबर की टाइल्स बनाने का काम, मिलेगा बेहतर मुनाफा!

 50 हजार की लागत में ऐसे शुरु करें गोबर ...

अगर मन में कुछ बड़ा करने की ठान लो, तो सफलता आपके कदम चूमने लगती है. यह कहावत आप एक ऐसे बिजनेस को शुरू करके साबित कर सकते हैं, जो आपको मुनाफ़ा ही मुनाफ़ा देगा. यह बिजनेस गोबर की टाइल्स बनाने का है. खास बात है कि इस बिजनेस को आप बेसहारा गायों की मदद से आसानी से शुरू कर सकते हैं. इन बेसहारा गायों का गोबर आपकी किस्मत बदल देगा. 

गोबर से तैयार की गई टाइल्स दिखने में बेहद खूबसूरत होती हैं. इसके साथ ही कमरे के लिए एसी की तरह भी काम करती हैं. बता दें कि गर्मियों के दिनों में आम तौर पर तापमान बढ़ जाता है. ऐसे में अगर गोबर की टाइल्स लगाई जाएं, तो कमरे का तापमान मे 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है. इस बिजनेस को गांव और शहर, दोनों जगह के लोग आसानी से शुरू कर सकते हैं. आइए आपको गोबर से बनने वाली टाइल्स के बिजनेस संबंधी कुछ ज़रूरी जानकारी देते हैं.

क्या है गोबर की टाइल्स बनाने का बिजनेस

इस बिजनेस में आपको लोगों के अनुसार टाइल्स का निर्माण करना होगा. सभी जानते हैं कि आजकल नए-नए तरीकों से लोग अपने घर बनवाते हैं, जिनमें कई तरह की टाइल्स का उपयोग किया जाता है. आपको भी गोबर से बनी टाइल्स बनाकर उपलब्ध करानी होंगी. यह बिजनेस आपको काफी अच्छा मुनाफ़ा दे सकता है, क्योंकि गर्मियों में गोबर की टाइल्स लगाने से तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है.

गोबर से तैयार उत्पाद
  • मूर्तियां
  • कलाकृतियां
  • चप्पल
  • मोबाइल कवर
  • चाभी रिंग आदि तैयार कर सकते हैं.

बिजनेस की लागत

इस बिजनेस में आपको ज्यादा लागत लगाने की आवश्कयता नहीं होगी. बस आपको एक कारखाना किराए पर लेना होगा. अगर आपके पास खुद की जगह है, तो बहुत अच्छा रहेगा, क्योंकि इससे लागत की बचत होगी. यहां आप गोबर को अच्छा तरह सुखा सकते हैं. इसके अलावा गोबर का चूरा बनाने की मशीन की व्यवस्था करनी होगी. कुल मिलाकर इस बिजनेस को शुरू करने में 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की लागत लग जाएगी. इस मशीन की अधिक जानकारी के लिए https://bit.ly/3ia6qtN पर विजिट कर सकते हैं.

ऐसे बनाएं गोबर की टाइल्स

इस बिजनेस में भारतीय नस्ल की गायों के गोबर का उपयोग कर सकते हैं. सबसे पहले गोबर को तकरीबन 2 दिन तक सुखाया जाता है. इसके बाद मशीन के जरिए चूरा बनाया जाता है. जब गोबर का चूरा तैयार हो जाए, तो इसमें खास किस्म की जड़ी बूटियां मिलाई जाती हैं. इसके लिए चंदन पाउडर, कमल के पत्ते, नील गिरी के पत्ते का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यह शुद्धता और ठंडक प्रदान करती हैं. इसी तरह जो जड़ी बूटियां ठंडक समेत अन्य राहत देती हैं, उन्हें मिला सकते हैं. इनका पेस्ट तैयार किया जाता है, जिसको अलग-अलग सांचे में रखकर उनका ब्रिक्स तैयार किया जाता है. इसके बाद ऑर्डर के हिसाब से टाइल्स बनाई जाती हैं.

राष्ट्रीय कामधेनु योजना करेगी मदद

इस बिजनेस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कामधेनु योजना मदद करेगी. आप इस य़ोजना के तहत देसी गाय और बैलों की नस्ल को बचाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. इसमें सरकार की तरफ से पूरी मदद की जाती है.

गोबर की टाइल्स की खासियत
Talies
यह टाइल्स घर के लिए बहुत फायदेंमद हैं. इन टाइल्स से बने फर्श पर गर्मियों में नंगे पैर टहलने से ठंडक मिलती है. इसके साथ ही हमारे शरीर के अनुसार तापमान मिलता है. इतना ही नहीं बिजली की बचत भी होती है. इसके जरिए शहरों में गांव जैसे कच्चे मिट्टी के घरों का आनंद उठा सकते हैं. यह टाइल्स घर की हवा को शुद्ध करती हैं, साथ ही यह प्रदूषण से मुक्त होती हैं. बता दें कि एक वर्ग फुट एरिया में इसकी लागत 15 से 20 रुपए आती है.

बिजनेस से मुनाफ़ा

आप इस बिजनेस से अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं, क्योंकि सालभर लोग अपने घरों का निर्माण कराते हैं. इस दौरान बाजार में टाइल्स की मांग बनी रहती है. अगर आप अपने बिजनेस की अच्छी मार्केटिंग करते हैं, तो यह आपको सालभर में लखपति तो बना ही देगा.

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...