Skip to main content

तो ऐसा खाना खाते हैं चीन के लोग, खबर पढ़कर हिल जाएगा आपका दिमाग


खाना, नाम सुनते ही मुँह मे पानी आ जाता है. खाने का नाम आते हैं आँखों के सामने लजीज व्यंजन आने लगते हैं लेकिन चीन के जिन व्यंजनों के बारे मे आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन्हें सुनने के बाद आपको खाने के नाम से घिन आने लगेगी. जी हाँ, चीन मे ऐसी-ऐसी चींज़े खाई जाती हैं जिनका नाम सुनते ही आप अपनी आँखे बंद कर लेंगे और घिन के मारे खाने का नाम ही नहीं लेंगे. चीन मे कई जगहों पर ऐसी-ऐसी चीज़े खाई जाती हैं जिनके बारे मे सुनने के बाद आप हैरान रह जाएंगे. आइए बताते हैं.

दुनिया के हर देश में खान-पान की अलग-अलग परंपराएं हैं लेकिन एक देश ऐसा है जहां जिंदा जानवरों को खाया जाता है

लेकिन चीन में 28 जनवरी को मनाए जाने वाले लूनर न्यू ईयर की तैयारियां जोरो पर हैं। इस दौरान तमाम परंपराओं के साथ खाने-पीने पर भी खास ध्यान दिया जाता है। चीन के लोग जिंदा जानवर खाने के शौकीन हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही जानवरों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें डिस के तौर पर जिंदा ही परोसा जाता है

1. ओएस्टर (घोंघा)-ऐसे जानवरों में से एक हैं, जिसे चीन के साथ-साथ पश्चिमी देशों में भी कच्चा या जिंदा ही परोसा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि ये मरने के बाद बहुत तेजी से खराब होने लगता है। घोंघा को शेल से निकालते ही ये खराब होने लगता है।

2. जिंदा झिंगा-चीन की पॉपुलर डिश जुई शिया को ड्रंकेन श्रिम्प (झींगा) के नाम से जाना जाता है। ये चीन के साथ-साथ यूनाईटेड स्टेट्स के भी कुछ चाइनीज रेस्टोरेंट में मिल जाएगी। इसमें झींगे को शराब में डुबोकर रखा जाता है। वह बार-बार बाहर निकलने के लिए उछल-कूद करता रहता है और ग्राहक उन्हें पकड़ते रहते हैं। इसके बाद उसे खाना ज्यादा आसान हो जाता है। इसमें झींगा तब मरता है, जब उसे चबाया जाता है। इस स्वादिष्ट व्यजंनों का चीन के अलग-अलग हिस्सों में उपयोग किया जाता है। यह डिश काफी महंगा है। क्योंकि यह जिंदा सर्व किया जाता है। हालांकि इस डिश को चीन में प्रतिबंधित कर दिया था लेकिन अभी भी यह आसानी से मिल जाती हैं।

3. मृत और जिंदा फिश-चीन में दूसरा पॉपुलर जिंदा खाया जाने वाला जानवर मृत या जिंदा फिश है। इससे बनने वाली इस डिश को यिंग यांग यू के नाम से जाना जाता है। इसमें फिश को ऐसे डीप फ्राई किया जाता है, जिसमें उसका सिर तेल में न डूबे। ऐसे में ये फिश फ्रेश और जिंदा रहती है। इसे इतनी जल्दी बनाया जाता है कि मछली के अंदरूनी अंगों को नुकसान न पहुंचे और वो 30 मिनट तक जिंदा रहे। यह डिश मीठा या खट्टे सॉस के साथ परोसा जाता है।

4. सांप-जिंदा सांप से बनी डिशेज चाइनीज शेफ की खासियत है। इस डिश को भी बड़ी तेजी से बनाया जाता है, ताकि इसे जिंदा खाया जा सके। शेफ को सिर अलग कर सांप की स्किन और आंतें निकालनी होती है। इसके बाद सांप का ताजा और कच्चा मीट ही परोसा जाता है।

5. जिंदा ताजा गधा-चीन में जिंदा और फ्रेश गधे हुओ जियाओ लू डिश के नाम से जाना जाता है। इसके लिए गधे के हाथ-पैर बांधकर जिंदा इसका बॉडी पार्ट काट दिया जाता है। इसके बाद तुरंत इसका कच्चा मीट कस्टमर को परोसा जाता है। हालांकि, चीन के हेनान और हुबेई में सरकार ने इसे बैन कर दिया है।

6. बंदर का कच्चा ब्रेन-चीन में जिंदा बंदर के ब्रेन स्पेशल और महंगी डिश में से एक है। इसका टेस्ट लेना सिर्फ रईस लोगों के ही बस की बात है। कई लोग तो इस डिश का ऑर्डर अपनी शानो-शौकत दिखाने के लिए ही करते हैं। इसके खराब टेस्ट के चलते इसकी सिंगल बाइट चबाना भी हर किसी के बस की बात नहीं। हालांकि, चीन में यह डिश अब बैन हो चुकी है, लेकिन गुआंगदोंग प्रॉविन्स में ये अभी भी कई जगह मिल जाता है।

7. चूहे के बच्चे-चूहों के नवजात बच्चे चीन में सबसे ज्यादा बिकने वाली डिश में से एक है। कस्टमर को यह चॉपस्टिक और स्पाइसी सॉस के साथ सर्व की जाती है। इस डिश को 'थ्री स्क्वीक्स बेबीज' कहा जाता है। इसे खाने का तरीका भी अजीब है। पहली बार में इसे चॉपस्टिक से एक ही झटके में खा लिया जाता है। इसके बाद सॉस के साथ खाया जाता है। यह डिश भी अब चाइना में बैन है, लेकिन फिर भी कई जगह इसे देखा जा सकता है।

8. बत्तख का जिंदा भ्रूण-बत्तख के भ्रूण से बनी डिश चीन के नानजियांग में बहुत पॉपुलर है। इसे जिंदा ही उबाला जाता है। आमतौर पर उबाला हुआ बत्तख का भ्रूण ही होता है। इसे चीन में बहुत चाव से खाया जाता है। ये डिश फिलीपीन्स में भी खाई जाती है और वहां इसे बालुत के नाम से जाना जाता है।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...