Skip to main content

सावधान ! मौत का कारण बनता है फ्रिज में रखा हुआ गूँथा आटा, जानिए क्यों


मौत का कारण बनता है फ्रिज में रखा हुआ गूँथा आटा - आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं है| जिस कारण से अक्सर महिलाएं एक बार में आटे को गुंद कर फ्रिज में रख देती है| उसके बाद उस आटे का धीरे-धीरे उपयोग करती है| इससे वह अपने समय की बचत करती है| ऐसा करना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है| आज हम आपको इसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं|

वो जमाना कब का बीत चुका है, जब लोग ताज़ी सब्जियाँ रोज़ाना लेकर आते थे और इन्हीं ताज़ी सब्जियों से ही अपना खाना तैयार करते थे। पर वो आजकल तो मानो संभव ही नहीं है, क्योंकि अब हमारे पास फ्रिज है। आज हर एक घर में फ्रिज मौजूद है।

इसकी मदद से लोग अतिरिक्त भोजन को कुछ अधिक समय तक सहेजकर रख सकते हैं, क्योंकि फ्रिज आपके भोजन के खराब होकर सड़ने की प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए धीमा कर देता है, जिससे आपका खाना अधिक समय तक ताज़ा रहे।

फ्रीज में रखे हुए खाने फल सब्जियों से लेकर अन्य खाद्य पदार्थों को लोग फ्रिज में रखते हैं। आमतौर पर भारतीय महिलाओं की ये आदत होती है, कि वे एक ही वक़्त में 2-3 दिन के लिए आटा गूँध लेती हैं। एक समय के भोजन के लिए जितने भी आटे की ज़रूरत है, उसका इस्तेमाल कर लेती हैं और बचे हुए गूँधे हुए आटे को फ्रिज में रख लेती हैं। लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं, जिन्हें हमे फ्रिज में रखने से बचना चाहिए।

ऐसी एक खाद्य सामाग्री है, गूँधा हुआ आटा। आइए जानते हैं, इस लेख के जरिये कि क्यों हमे फ्रिज में गूँधा हुआ आटा नहीं रखना चाहिए।

आटे को बंद कर जब फ्रिज में रखा जाता है| तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया चिपक जाते है| साथ ही उसमें फफूंदी भी उत्पन्न हो सकते हैं| जिसकी वजह से आपके स्वास्थ्य को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है| अगर फ्रिज में रखे आटे में हल्का सा भी खट्टापन आ जाए| तो उस आटे का उपयोग बिल्कुल ना करें| अगर आप इसकी रोटियां बना कर खाते हैं| तो आपको फूड पाइज़निंग हो सकता है|कई महिलाएं एक साथ बहुत सारे आटे को गुंद कर फ्रिज में रख देती है| और उसका धीरे धीरे उपयोग करती है| इससे आटे का पोषक तत्व तो नष्ट होता ही है| साथ ही गूदे हुए आटे में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं| जिसकी रोटियां बनाकर खाने से शरीर में कई तरह की बीमारियां होने लगती है|

वैसे हमे लगता है अक्सर गृहणियों की आदात होती है कि वह आटा बच जाने पर उसे फ्रिज में रख देती है ताकि बाद में उपयोग कर सके. कभी कभी तो आटा गलती से बच जाता है लेकिन कुछ लोग तो इतने आलसी होते है कि दिन में दो बार आटा ना गूंथना पड़े तो ढेर सार आटा गूंथ कर फ्रिज में पटक देते है. लेकिन क्या एस करना सेहत मंद होता है?

विशेषज्ञों कि माने तो आटा भिगोते ही तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए वरना उसमे ऐसे रासायनिक बदलाव आते है जो सेहत के लिए बहुत हानिकारक हो सकते है. ऐसा आयुर्वेद में भी स्पष्ट कहा गया है . इसलिए फ्रिज का इस्तेमाल आटा रखने के लिए ना करे. कुछ ही दिन में ऐसी आदत बन जायेगी की जितनी रोटियाँ लगती है उतना ही आटा भिगोया जाए और इसमें ज़्यादा समय भी नहीं लगता. ताज़े आटे की रोटियाँ ज़्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है और आपकी सेहत पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता. अगर आटा खमीरा हो जाए ओर जयादा पुराना हो तो उसे न खाए।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार फ्रीज मेंं गूँथा हुआ आटा क्यों नही रखना चाहिये
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार फ्रीज में रखा आटा भूत-प्रेत को बुलाता है| अगर आप फ्रीज में आटा रखते हैं तो मृतात्मा आपके घर आ सकती है फ्रीज में गूंथा आटा आपका समय तो बचा सकता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके घर में भूत-प्रेत को निमंत्रित करता है। फ्रीज में गूंथा आटा उस पिंड के समान माना गया है जो पिंड मृत्यु के बाद मृतात्मा के लिए रखे जाते हैं।

घर में गूंथा हुआ आटा फ्रीज में रखने की वृत्ति बन जाती है तब भूत इस पिंड का भक्षण करने के लिए घर में आने शुरू हो जाते हैं जो मृत्यु के बाद पिंड पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे भूत और प्रेत फ्रीज में रखे इस पिंड से तृप्ति पाने का उपक्रम करते हैं।जिन परिवारों में भी इस प्रकार की आदत है वहां किसी न किसी प्रकार के अनिष्ट, रोग-शोक और क्रोध तथा आलस्य का डेरा होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बासी भोजन भूत भोजन होता है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति जीवन में रोग और परेशानियों से घिरा रहता है।

Comments

Popular posts from this blog

किस जाति के होते हैं नाम के पीछे मुल्ला लगाने वाले मुसलमान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली।  भारत में कई धर्मों के लोग साथ मिलकर रहते हैं। यहां एक ही जगह पर कई धर्म-समुदाय के लोग रहकर एकता में अनेकता का उदहारण पेश करते हैं। हिंदू धर्म की तरह मुस्लिम धर्म में भी कई जातियां होती है। इसमें खान, सैयद, पठान, कुरैशी, शेख, अंसारी आदि शामिल हैं। क्या आपको पता है कि कई मुसलमान अपने नाम के पीछे मुल्ला लगाते हैं। आज हम आपको मुल्ला सरनेम और जाति के बारे में बताएंगे। कौन होते हैं मुल्ला मुल्ला शब्द फारसी से लिया गया है, जो कि अरबी के शब्द ‘मौला’ से ताल्लुक रखता है। मौला का अर्थ होता है मास्टर और गार्डियन। मुल्ला इस्लामी धार्मिक शिक्षा में योग्यता रखने वाले लोगों को कहते हैं। इसका उपयोग स्थानीय इस्लामी धर्मगुरु या मस्जिद के इमाम के लिए भी किया जाता है। साथ ही जो मुसलमान शरीअत का आलिम होता है उसे भी आदर से मुल्ला कहा जाता है। कसाई में आते हैं ये लोग इस्लामी ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए मुल्ला कोई आधिकारिक उपाधि नहीं है। कई मुसलमानों में ये पारिवारिक सरनेम भी है। जैसे हिंदुओं में धर्म के जानकार को पंडित कहते हैं और उनके घर वाले भी ये सरनेम लगाने लगते हैं...

“सर तन से जुदा,सर तन से जुदा” : मजहबी उन्मादियों का दुस्साहस, पुणे जिलाधिकारी ऑफिस पर किया संत रामगिरि की हत्या का ऐलान

नई दिल्ली ।  पुणे कलेक्टर के कार्यालय के बाहर एक बड़ी भीड़ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया, जब वहां “अल्लाह हू अकबर” और “सर तन से जुदा” जैसे उग्र नारे लगाए गए। यह भीड़ हिंदू संत महंत रामगिरि महाराज की हत्या की मांग कर रही थी। इन नारों ने पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। नारेबाजी के दौरान “नारा ए तकबीर, अल्लाहु अकबर” और “लब्बैक या रसूलिल्लाह” जैसे धार्मिक नारे भी लगाए गए, जो कुछ ही देर में ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक और हिंसक नारों में तब्दील हो गए। इस तरह की नारेबाजी आमतौर पर पाकिस्तान में जिहादी तत्वों द्वारा सुनी जाती है, लेकिन इसे पुणे की सड़कों पर सुना जाना बेहद चौंकाने वाला है। ‘नारा ए तकदीर, अल्लाहु अकबर’ व ‘…रसूलिल्लाह’ बोलते बोलते ये जिहादियों की भीड़’सर तन से जुदा’ की अपनी संस्कृति पर कैसे उतर जाती है? ये नारे पुराने नहीं, पाकिस्तान में भी नहीं अपितु, अभी हाल ही में पुणे में लगे हैं। किंतु फिर भी कम्युजिहादी व सेक्युलर जमात में सन्नाटा पसरा है!!…  pic.twitter.com/etJ96jH5rK — विनोद बंसल Vinod Bansal (@vinod_bansal)...

भारत वापस आएगी नटराज की नौवीं सदी की दुर्लभ मूर्ति, 22 साल पहले राजस्थान से हुई थी चोरी

22 साल पहले भगवान शिव की जो दुर्लभ मूर्ति चुराकर लंदन पहुंचा दी गई थी, वो वापस भारत आ रही है। आज-कल में नटराज की यह मूर्ति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सौंप दी जाएगी। नौवीं शताब्दी में चार फीट की इस मूर्ति का निर्माण प्रतिहार शैली में किया गया था। राजस्थान के बाड़ौली स्थित घंटेश्वर मंदिर से फरवरी, 1998 में यह मूर्ति गायब हो गई थी। पांच साल बाद पता चला कि तस्करों ने मूर्ति को ब्रिटेन पहुंचा दिया है। भारतीय एजेंसियां तभी से इसकी तलाश में थी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने ब्रिटिश सरकार की मदद से 2005 में इसे एक निजी संग्रहकर्ता से स्वेच्छा से हासिल किया। तभी से यह मूर्ति लंदन में इंडिया हाउस की लॉबी की रौनक बढ़ा रही थी। भारत सरकार अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में एक नई ऊर्जा के साथ जुटी गुई है। विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारतीय एजेंसियां चोरी व तस्करी की गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने में जुटी हैं। भारत से चोरी हुई ब्रह्मा व ब्रह्माणी की मूर्ति भी ब्रिटेन से ही 2017 में वापस लाई गई थी। लंदन पुलिस द्वारा बरामद 12वीं सदी की बुद्ध की एक दुर्लभ कांस्य प्रतिमा को ...